अध्याय 183

जेम्स मेरे पास खड़े-खड़े धीमे से हँस पड़ा।

शर्म और गुस्से से तिलमिलाकर मैं उसकी तरफ मुड़ी, उसे घूरा और हल्का-सा धक्का दे दिया। “हँसने की भी हिम्मत है तुम्हारी!”

वह पीछे की ओर बिस्तर पर जा गिरा, उसकी पीठ गद्दे से टकराई। उसके मुँह से एक दबी-सी कराह निकली और वह भौंहें सिकोड़ते ही पलभर में पीला पड़ गय...

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